Poems

आता हुआ अतीत

आता हुआ अतीत,
भविष्य जिसे जीते हुए भी
अभी जानना बाक़ी है

दरवाज़े के परे ज़िंदगी है,
और अटकल लगी है मन में कि
बाहर या भीतर
इस तरफ़ या उधर
यह बंद है या खुला !
किसे है प्रतीक्षा वहाँ मेरी
किसकी है प्रतीक्षा मुझे
अभी जानना बाक़ी है

एक कदम आगे
एक कदम छूटता है पीछे
सच ना चाबी है ना ही ताला

 

(पत्थर हो जाएगी नदी, 2007)

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Comments (3)

neha deshwal

it’s really very nice poem

Tamashree purkayastha

nice poem

Fawzi

This is a beautiful poem. It is full of fantasy and lots of wisdom at the same time. In fact, it represents everyboy’s life whether we know it or not.

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