Poems

क्या तुमने भी सुना

चलती रही सारी रात
तुम्हारी बेचैनी लिज़बन की गीली सड़कों पर
रिमझिम के साथ
मूक कराह कि
जिसे सुन जाग उठा बहुत सबेरे,
कोई चिड़िया बोलती झुटपुटे में
जैसे वह भी जाग पड़ी कुछ सुनकर
सोई नहीं सारी रात कुछ देखकर बंद आँखों से 
चलती रही तुम्हारी बेचैनी
मेरे भीतर
टूटती आवाज़ समुंदर के सीत्कार में
उमड़ती लहरों के बीच,
चादर की तहों में करवट बदलते
क्या तुमने भी सुना उस चिड़िया को
 

 


(पत्थर हो जाएगी नदी, 2007)

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Comments (3)

Shubham rana

Thank you Bhai for your poem. 

Saiya

awesome poem its like real life 

barbie

I want d translation in hindi!
PTC Response: The Hindi version can be found here
 

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